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Showing posts from May, 2020

शायर ए ख्याल - कविताएं

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             शायर ए ख्याल एक शायर या एक लेखक किस तरह सोचता है? ऐसा क्या होता है उसके पास के वो किसी भी चीज़ से प्रभावित होता है और उसको एक अलग अंदाज़ में कागज़ पे उतार देता है? इसे मैं ऊपरवाले की मेहरबानी मानता हूं के उसने मुझे ये कला बख्शी और इस काबिल बनाया के मैं अपने ज़हन के अंदर जा कर हर बार कुछ नया निकाल ले आऊं। ज़िन्दगी में एक एहसास ही काफ़ी होता है कुछ कर जाने के लिए। मैैं भी अकेलेपन के गहने दश्त में कई रोज़ गुमनाम रहा तब मैंने इस कला को अपने अंदर से ढूंढ़ा। वो मेरी पहली कविता भी रात्रि के उस अंधकार में निकली जब नींद का मैं गुलाम ना था। मुझे मेरे सपने भी एक कविता की तरह दिखते थे। अपने सपनों और उसमे पैदा होती व्यथाओं पर भी एक कविता लिखी थी -                     सपने        ये उतावले सपने,        ये ही मेरे अपने,      ...

शायर ए ख्याल - कविताएं

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             शायर ए ख्याल एक शायर या एक लेखक किस तरह सोचता है? ऐसा क्या होता है उसके पास के वो किसी भी चीज़ से प्रभावित होता है और उसको एक अलग अंदाज़ में कागज़ पे उतार देता है? इसे मैं ऊपरवाले की मेहरबानी मानता हूं के उसने मुझे ये कला बख्शी और इस काबिल बनाया के मैं अपने ज़हन के अंदर जा कर हर बार कुछ नया निकाल ले आऊं। ज़िन्दगी में एक एहसास ही काफ़ी होता है कुछ कर जाने के लिए। मैैं भी अकेलेपन के गहने दश्त में कई रोज़ गुमनाम रहा तब मैंने इस कला को अपने अंदर से ढूंढ़ा। वो मेरी पहली कविता भी रात्रि के उस अंधकार में निकली जब नींद का मैं गुलाम ना था। मुझे मेरे सपने भी एक कविता की तरह दिखते थे। अपने सपनों और उसमे पैदा होती व्यथाओं पर भी एक कविता लिखी थी -                     सपने        ये उतावले सपने,        ये ही मेरे अपने,      ...

Short story- I.N.A. का कबूतर

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                          I.N.A का कबूतर    2015 ट्रेन में झटका फ़रक्का एक्सप्रेस आ गई दिल्ली शहर सुबह सात बजे। दिल्ली मेरे लिए मेरी स्वप्न नगरी थी, जैसे आम लोगों की मुंबई होती है। इस ट्रेन सफ़र में मेरे साथी थे मेरे दो जिगरी यार रोहन और इरफ़ान। इरफ़ान ने टिकट कराई थी और लखनऊ से हमारी ट्रेन चली। मैंने अपने तीन साल लखनऊ से बनारस सिर्फ वरुणा एक्सप्रेस की जनरल बोगी में काट दिए और ये इसलिए क्यूंकि ना तो मुझे टिकट कराना आता था और ना ही मुझे सीखने का कोई शौक था। लखनऊ में ग्रेजुएशन हो गया था हम तीनों का, रोहन और मैं साथ में लखनऊ विश्वविद्यालय में थे और इरफ़ान मियां दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र थे। रोहन को आगे M.C.A करना था, और उसके लिए कोचिंग की ज़रूरत थी जो कि मिलती दिल्ली में और वो कभी पहले दूसरे शहर में रहा नहीं था तो उसने अपने घर पर लोगों को बड़ी मशक्कत से इसके लिए मनाया और काफ़ी ना नुकुर के बाद आख़िरकार वो मान ही गए। मेरे घर पे भी पूछा गया के किस लिए दिल्ली जाना है? अभी तो लखनऊ से व...

IPhone SE 2020 - Almost A Flagship Killer

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iPhone SE 2020 Every time when I hear about a new Apple device, I get a picture of the legendary Steve Jobs inside my head holding that path-breaking iPhone 4 in his classic style. It was such a legendary design that to this day it looks elegant and we see a lot of people in love with that bezel design and that home button which now perfectly acts as a rapid fingerprint sensor. To be honest, Apple in India has always been a status symbol because of its over the edge pricing. Even today the high-end iPhone 11 pro costs more than a lakh rupees which even for me,  a technology buff is a lot of money to spend on a mobile phone. IPhone se 2020 Since everyone would like to forget about this obnoxious year, Apple did something amazing which is quite path-breaking. They launched a new device, their special edition(that's what SE stands for) iPhone for merely 42,500 rupees. At this amazing price, you get the A-13 bionic chip which runs their flagship the iPhone 11 pro. App...

कोरोना- एक ठहराव

कोरोना वायरस से आज पूरी दुनिया वाक़िफ है, और क्यों ना हो, देखते ही देखते कई लाख लोग इससे ग्रसित हो चुके हैं और कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। भारत भी हर सशक्त देश की तरह इस महामारी से जूझ रहा है, पर हमारे यहां चीज़ें ज़रा अलग होती है, इसमें शायद किसी को कोई संदेह नहीं होगा। हमारे यहां इसको ठीक करने के नुस्खे निकलते है, कई नए बाबा झाड़-फूंक कर इसको ठीक करने का दावा करते है तो कोई सजदे पढ़ कर इन्हें ठीक करने की सलाह देते हैं।पर यहां ना दुआ काम आ रही है और दवा नाम की तो कोई चीज़ है ही नहीं इसकी।  ना तो मैं ये लेख कोई नुस्खा बताने को लिख रहा ना ही किसी को सांत्वना प्रदान करने के लिए। मेरे विचार में ये नियति द्वारा लाया गया एक ठहराव है, अब आप में से कुछ लोग नियति को अगर चीन की वो लैब समझ लें तो भाई वो आपकी तार्किक शक्ति का प्रमाण होगा। मैं इसे ठहराव इसलिए बोल रहा हूं, क्योंकि ये इस आधुनिकीकरण से ग्रसित इस संसार में एक वरदान और एक अभिशाप बन कर आया है। इस अनचाहे मेहमान ने सबको अपने घरों में कैद कर दिया है, चाहे वो अंबानी साहब होएं या फ़िर एक बंधुआ मजदूर। कुछ ही लोग हैं जो इस महामारी ...

कविता - शहर

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क्या होता है जब आप अपने अरमानों के लिए, अपने सपनों के लिए अपने शहर से दूसरे शहर जाते है? हम कुछ दिन तो ज़रूर खुश रहते है, वो नए शहर की महक से, उसकी धूप से, उसकी गलियों से, उसके हर रूप से पर आखिरकार एक रात आप जब अकेले सोच रहे होते है तो आपको अपना घर याद आता है, अपने मां बाप याद आते है, अपना शहर याद आता है। ऐसे ही इक रोज़ मेरे दोस्त ' आशिक' का मुझे फोन आया, वो बहुत उम्दा गायक है, मेरे घनिष्ठ मित्रों में से एक है और वो भी मेरी तरह दिल्ली शहर में एक परीक्षा की तैयारी के लिए आया था पर उस फोन कॉल पे वो काफ़ी परेशान था और मुझसे कहता है, "यार रितेश, कुछ अच्छा नहीं लग रहा है इस शहर में, कुछ लिखो इसपे, एक गाना बनाएंगे हम" मैंने उनसे पूछा के उनको क्या महसूस हो रहा है और सब जानने के बाद अपनी ये कविता जिसका नाम "शहर" है लिखी।                  शहर  इस शहर से ना मैं वाबस्ता,  कहां ले जा रहा है ये रास्ता,  यहां नींद की तंगी,  इंसान बड़े जंगी,  ईमान ना है यहां सस्ता,  कहां ले जा रहा है ये रास्ता।  जुनून की यहां...

A personal loss - IRRFAN

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Irrfan (1967-2020) Irrfan is no more. This statement is true and false at the same time. An actor of that stature can't die, he'll always be a click away from us, thanks to the streaming platforms. I just watched "Paan Singh Tomar" before writing this blog. I am not an expert in acting but I understand this much that it's all about perfect expressions and who was better than Irrfan when it comes to expressions. How can anyone forget his magical eyes! As Shahrukh Sir tweeted, "Paimana kahe hai koi, Maikhana kahe hai, Duniya teri aankhon ko, Kya Kya na kahe hai". With his unconventional facial features and all those unconventional roles, this man drew attention to his talent by his choices of movies and his unmatchable acting prowess. From the very start till the very end, no one ever complained about the ACTING of Sir Irrfan. When I got the news of his passing, it instantly felt like a personal loss, like someone too close to me has left. I am n...